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जिले में स्मार्ट पुलिसिग सिस्टम खड़ा करेगी फायर कंपनी

 मुजफ्फरनगर :- जनपद पुलिस अब स्मार्ट पुलिसिग सिस्टम के जरिए आम जनता को राहत देने की तैयारी में लगी है। फायर कंपनी ब्लाकचेन तकनीक के जरिए पुलिस का डाटा संरक्षित करेगी। इससे एक क्लिक पर पूरी जानकारी मिल सकेगी। एसएसपी की देखरेख में पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। देश में सबसे पहले जनपद में यह पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।

एसएसपी अभिषेक यादव ने मंगलवार को अपने कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि फायर कंपनी द्वारा ब्लाकचेन तकनीक द्वारा जनपद पुलिस के सभी रिकार्ड को डिजीटलाइज्ड कर संरक्षित करेगी। जिससे कोई भी व्यक्ति पुलिस से संबंधित उसके मामले की जानकारी किसी भी समय प्राप्त कर सकेगा। रिकार्ड में हेराफेरी की गुंजाइश भी नहीं होगी। एसएसपी ने बताया कि पुलिस वैरीफिकेशन से लेकर बड़े केस तक इस तकनीक से एक क्लिक पर पूरी जानकारी मिलेगी। इसलिए पुलिस डेटा बेस पारदर्शी करने पर काम चल रहा है।




सबूत से नहीं हो सकेगी छेड़खानी

एसएसपी ने बताया कि आम तौर से किसी भी घटना के बाद उसके सुबूत एकत्र कर लिए जाते हैं, लेकिन विवेचना या जांच के दौरान वे सुबूत विभिन्न पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचते हैं। संबंधित व्यक्ति को आंशका रहती है कि उसके सुबूत के साथ छेड़छाड़ न हो जाए। इस तरह की किसी भी संभावना को यह तकनीक खत्म कर देगी। यह सिस्टम ब्लाकचेन की उच्च वितरण एवं पारदर्शी कंप्यूटिग नेटवर्क नकतनीक पर आधारित होगा। यानी किस अधिकारी के पास सुबूत या मुकदमे से संबंधित को सामान किस समय पहुंचा, किस शेप में पहुंचा, कितना समय उसके पास रहा और उसने कब वापस किया इत्यादि। इस सब जानकारी का एक डेटाबेस रहेगा। रिकार्ड में कोई हेराफेरी भी नहीं कर सकेगा।

ट्रैफिक सिस्टम में होगा सुधार

एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि फायर के माध्यम से जिले के पूरे ट्रेफिक सिस्टम का डेटा कलेक्ट कर आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे। इसके अलावा आपराधिक घटनाओं की जानकारी, अपराध के ²ष्टिकोण से अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त की आवश्यकता तथा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे किसी भी घटना से पहले हालात को जानकर उसके निदान का रास्ता भी इसी तकनीक के माध्यम से खोजने में मदद मिलेगी। बताया कि पहले पायलट प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा, यह एक अभिनव प्रयोग होगा। शुरुआत में तीन माह के दौरान अलग-अलग प्रकार के प्रयोग होंगे। शुरुआत में पुलिस के डुप्लीकेट रिकार्ड लेकर डेटा बेस तैयार किया जाएगा। टेस्ट के बाद उसको आगे बढाया जाएगा।


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