जिले में कोरोना वैक्सीन का टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है। एक दिन में 51 हजार से अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज लगाई गई है। इसके बावजूद पहले लोगों की उदासीनता तो कभी वैक्सीन की कमी के चलते कोरोना टीकाकरण अभियान लक्ष्य से पिछड़ गया है। यहां तक कि दूसरी डोज लगवाने में फ्रंटलाइन वर्कर और हेल्थकेयर वर्कर भी उदासीन बने हुए है। हालांकि इन वर्गो में पहली डोज लक्ष्य से अधिक लगी थी। 18 वर्ष से अधिक आयु वाले आयु वर्ग में लक्ष्य का केवल 38 प्रतिशत लोगों को ही टीकाकरण हो पाया है।
मुजफ्फरनगर जिले में अब तक हुए कोरोना वैक्सीन टीकाकरण अभियान में कुल 1224577 लोगों को वैक्सीन की डोज लगाई गई है। इनमें 1034564 लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगी है, जबकि कुल 190013 लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगी हैं। इनमें 12155 हेल्थकेयर वर्कर हैं। पहली डोज तो सभी हेल्थकेयर वर्कर ने लगवा ली थी, लेकिन दूसरी डोज इनमें से 11444 ने ही लगवाई। यानी छह प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मी भी अभी दूसरी डोज लगवाने से वंचित हैं। इसी तरह से फ्रंट लाइन वर्कर की श्रेणी में 9764 को सूचीबद्ध किया गया था लेकिन इसके सापेक्ष 104 प्रतिशत लोगों यानी 10198 ने कोरोना वैक्सीन की डोज लगवाई। लेकिन दूसरी डोज लगवाने में फ्रंट लाइन वर्कर भी पीछे हो गए। केवल 9020 ने भी दूसरी डोज लगवाई। यानि 12 प्रतिशत फ्रंट लाइन वर्कर भी वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने से वंचित हैं। सरकार कोरेाना वैक्सीन पूरी तरह से निशुल्क लगा रही है। दूसरी लहर में लोग कोरोना के कारण हुई मौतों का मंजर अपनी आंखों से देख भी चुके हैं। इसके बावजूद 45 वर्ष से अधिक आयु के 648510 लोगों को वैक्सीन लगाने के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 76 प्रतिशत लोगों 490877 लोगों को ही 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई है। जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में जिले में 1388417 युवाओं को वैक्सीन की पहली डोज लगाने का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष केवल 38 प्रतिशत यानि 521336 लोगों ने ही वैक्सीन की पहली डोज लगवाई। दूसरी डोज लगवाने में स्थिति और अधिक खराब है।

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