जेएनएन, मुजफ्फरनगर। 2013 के दंगे से पहले शहीद चौक पर हुई सभा में भड़काऊ भाषण देने के मामले में पूर्व सांसद कादिर राना, पूर्व विधायक नूरलीम राना सहित आठ आरोपित कोर्ट में पेश हुए। गुरुवार को आरोपितों पर आरोप तय होने थे, लेकिन पूर्व सांसद सईदुज्जमां, सलमान सईद के कोर्ट में उपस्थित न होने के कारण आरोप तय नहीं हो सके। इस मामले में अब सुनवाई 13 सितंबर को होगी।
27 अगस्त क. कवाल में हुई तीन हत्याओं के बाद जनपद का माहौल गर्मा गया था। शहर कोतवाली क्षेत्र के शहीद चौक पर जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने सभा का आयोजन किया था। इसके बाद शहर कोतवाली पुलिस ने पूर्व सांसद कादिर राना, सईदुज्जमां, पूर्व विधायक नूरसलीम राना, पूर्व विधायक मौलाना जमील, सलमान सईद, असद जमां, मुशर्रफ कुरैशी, नौशाद कुरैशी, अहसान कुरैशी तथा सुल्तान मुशीर के विरुद्ध भड़काऊ भाषण सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। घटना के मुकदमे् की सुनवाई विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के जज गोपाल उपाध्याय के समक्ष चल रही है. गुरुवार को इस मामले में सभी 10 आरोपितों पर आरोप तय होने थे, लेकिन पूर्व सांसद सईदुज्जमां तथा सलमान सईद के अधिवक्ता एड. अमजद अली की याचना पर कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 सितंबर को करने के आदेश जारी किया। इससे पूर्व पूर्व सांसद कादिर राना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र शर्मा, पूर्व विधायक नूरसलीम राना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चन्द्रवीर सिंह ने पैरवी की। एड. चन्द्रवीर सिंह ने कहा कि उनके मुवक्किल पर केवल धारा-144 के उल्लंघन का आरोप है। बताया कि बाकी धाराएं पुलिस ने विवेचना उपरांत काट दी थी। नौशाद कुरैशी, मुशर्रफ तथा अहसान कुरैशी की ओर से एड. नकली सिंह त्यागी ने पैरवी की। स्वयं पैरवी कर आरोप से उन्मोचित करने की याचना
पूर्व सभासद एवं एड. असद जमां ने अपने बचाव में स्वयं पैरवी करते हुए आरोप से उन्मोचित करने की याचना की। उन्होंने आरोप तय किए जाने को न्यायोचित न बताते हुए कहा कि वह सभा में मौजूद ही नहीं थे। न उन्होंने कोई भड़काऊ भाषण दिया तथा उससे किसी को क्षति भी नहीं पहुंची। सत्ता पक्ष के दबाव में उनको फर्जी तरीके से नामजद किया गया। उन्होंने 245/2 सीआरपीसी का हवाला देते हुए कोर्ट से स्वयं को डिस्चार्ज करने की याचना की।

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