मुजफ्फरनगर:- जिले में नौसिखिया वाहन चालक बेरोकटोक सड़कों पर दोपहिया व चार पहिया वाहन दौड़ा रहे हैं। ये चालक अपनी व दूसरों की जान के दुश्मन भी बन रहे हैं। हाल ही में शहर से देहात तक जिले में सड़क सुरक्षा अभियान चलाया गया और अधिकारियों ने लोगों को जागरूक किया, लेकिन सब बेअसर। इतना ही नहीं चार पहिया वाहन सिखाने के लिए जिले में चार ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीटयूट चल रहे हैं, लेकिन लोग यहां आना गंवारा नहीं कर रहे हैं। आए दिन होने वाले सड़क हादसे नौसिखिया वाहन चालकों के कारण हो रहे हैं। हाल ही में सूबे की सरकार ने सभी जिलों में ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खोलने के निर्देश दिए हैं ताकि चालक वहां पर वाहन चलाना सीख सकें और हादसों में कमी आ सके। हालांकि जिले में चार ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल परिवहन विभाग से रजिस्टर्ड हैं, लेकिन परिवहन विभाग के पास अपना कोई ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल नहीं हैं। परिवहन विभाग में तीन लाख छह हजार के लगभग वाहनों का पंजीकरण है। इतना ही नहीं हर माह लगभग तीन हजार नए वाहनों का भी रजिस्ट्रेशन हो रहा है। तीन साल में भी शुरू नहीं हुआ ट्रेनिंग स्कूल परिवहन विभाग ने मेरठ रोड स्थित आइटीआइ परिसर में तीन साल पहले ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल बनाने की शुरुआत की थी। तीन साल में भी यहां पर निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इतना ही नहीं हाल ही में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर धीरज साहू ने यहां पहुंचकर निरीक्षण किया था। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने तीन माह में कार्य पूरा कर ट्रेनिंग स्कूल शुरू करने के निर्देश दिए थे। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के निरीक्षण के बाद यहां चल रहे कार्य में तेजी आई है। भीड़ भरी सड़कों पर सिखा रहे ड्राइविंग जिले में चल रहे प्राइवेट ड्राइविंग स्कूल लोगों को भीड़ भरी सड़कों पर वाहन चलाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। भोपा रोड, मेरठ रोड, रुड़की रोड, खतौली में जीटी रोड समेत अन्य भीड़भाड़ वाले मार्ग पर अक्सर ड्राइविंग स्कूल के कर्मचारी लोगों को वाहन सिखाते हुए दिखाई देते हैं, जबकि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे व्यक्ति को भीड़ वाली सड़क पर ट्रेनिंग नहीं देनी चाहिए। इसके इतर लोग नवीन मंडी स्थल, राजकीय इंटर कालेज का मैदान समेत अन्य मैदानों पर वाहन चलाना सीखते हुए दिखाई दे जाएंगे। बीते साल कार चलाना सीख रही महिला ने राजकीय इंटर कालेज की दीवार में टक्कर मार दी थी। जिले में मात्र चार ड्राइविंग स्कूल पंजीकृत जिले में वाहन सिखाने के लिए चार मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल चल रहे हैं। इनमें तीन अकेले शहर में हैं, जबकि एक देहात में है। 1. वास्ती मोटर ड्राइविंग स्कूल, अंसारी रोड 2. सारा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल, अंबा विहार 3. नेशनल मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल, रुड़की रोड 4. मनोहर मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल, खतौली ये है ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालन के नियम 1 न्यूनतम 500 वर्ग फुट में ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल होना चाहिए। 2 प्रशिक्षक को मोटर यांत्रिक पाठ्यक्रम में आइटीआइ या डिप्लोमाधारी होना चाहिए। 3 चार पहिया वाहन के इंजन के विभिन्न संघटकों को दर्शाने वाला चार्ट होना चाहिए। 4 जिस वाहन से प्रशिक्षण देना है, उसमें डुअल कंट्रोल होना चाहिए। 5 प्रशिक्षण केंद्र में ब्लैकबोर्ड ट्रैफिक के नियम और संकेतकों की जानकारी देने वाला चार्ट होना चाहिए। 6 प्रशिक्षण दिए जाने वाले वाहन पर ट्रेनिंग सेंटर का नाम और जगह मोटे अक्षरों में अंकित होना चाहिए, यह भी उल्लेख होना चाहिए कि इसे प्रशिक्षण के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। 7 दस घंटे क्लासरूम में और इतना ही समय सड़क पर वाहन प्रशिक्षण दिया जाना अनिवार्य है। इन्होंने कहा... पूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ही चालक को वाहन लेकर सड़क पर उतारना चाहिए। विभाग समय-समय पर इसके लिए जागरूकता अभियान चलाता है। हाल ही में सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत लोगों को जागरूक किया गया था। चेकिंग अभियान चलाकर जुर्माना वसूली भी की जाती है। शीघ्र ही आइटीआइ परिसर में बन रहे ड्राइविंग स्कूल में चालकों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया जाएगा। -सुरेंद्र सिंह, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी