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समाज कल्याण विभाग में हुआ था 100 करोड़ से अधिक का घोटाला

 




समाज कल्याण विभाग में तैनात रहे लिपिक से 7.86 करोड़ रुपये की रिकवरी के आदेश हुए हैं। गबन की यह धनराशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इससे पूर्व विभाग में 100 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। आरोपित लिपिक अनिल वर्मा पूर्व में जेल गए आरोपितों से मिल गया था और इसी तर्ज पर फिर से करीब आठ करोड़ रुपये का घोटाला किया।

समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और पेंशन में वर्ष 2004 से घोटालों की शुरुआत हुई। वर्ष 2009 में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी रिकू सिंह राही ने करीब 100 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा था। तब उन पर जानलेवा हमला हुआ था। इस मामले में पूर्व समाज कल्याण अधिकारी गयासुद्दीन मलिक, सहायक लेखाकार अशोक कश्यप सस्पेंड हुए थे। इसके बाद पटल का चार्ज अनिल वर्मा को दिया गया था। कुछ समय बाद अशोक कश्यप ने अनिल वर्मा से साठगांठ कर ली। अनिल वर्मा ने पूर्व की भांति जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद नाम से बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपये का गबन किया। यह दुस्साहस तब किया, जबकि 100 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच शासन से चल रही थी। वर्ष 2012 में अनिल वर्मा की करतूत का राजफाश हुआ था।


एसआइटी कर रही जांच

समाज कल्याण विभाग में हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक के मामले की जांच एसआइटी कर रही है। बीते दिनों एसआइटी में एसपी देवरंजन वर्मा टीम के साथ जिले में आए थे। समाज कल्याण विभाग के दफ्तर, ट्रेजरी आफिस और बैंक की विभिन्न शाखाओं में गए थे। हालांकि घोटाले से संबंधित समस्त दस्तावेज टीम को नहीं मिले हैं।

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